हरियाणा सूचना आयोग का बड़ा फैसला : सभी विभाग अधिकतम जानकारी अपनी वेबसाइट पर करें अपलोड
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की कवायद

सत्य खबर हरियाणा
Haryana state information commission : सरकारी विभागों से छोटी-छोटी जानकारियां पाने के लिए लोगों को बार-बार आरटीआई आवेदन न करना पड़े, इसके लिए हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने विभागों को सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून की मूल भावना याद दिलाते हुए अहम आदेश दिए है।

राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने एक अंतरिम आदेश में कहा है कि आरटीआई कानून का असली उद्देश्य आवेदन आने पर सूचना देना नहीं, बल्कि अधिकतम जानकारी पहले से ही सार्वजनिक करना है। आयोग ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा-4 के तहत प्रत्येक सरकारी विभाग की कानूनी जिम्मेदारी है कि वह अपने कामकाज से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां स्वतः सार्वजनिक करे। इससे नागरिकों को सामान्य सूचनाओं के लिए अलग से आरटीआई लगाने की आवश्यकता नहीं होगी और उन्हें विभाग की वेबसाइट या अन्य सार्वजनिक माध्यमों से ही जानकारी मिल जाएगी।
मामले में क्षितिज दत्ता ने आयोग से अनुरोध किया था कि उनकी शिकायत को द्वितीय अपील के रूप में माना जाए, क्योंकि उनका मुख्य विवाद सूचना उपलब्ध नहीं कराए जाने से संबंधित था। आयोग ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए आयोग सचिवालय को शिकायत को द्वितीय अपील में परिवर्तित कर उचित अपील संख्या आवंटित करने के निर्देश दिए।
प्रकटीकरण से संबंधित मांगी गई सूचनाएं
राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने अपने आदेश में कहा कि आरटीआई आवेदन में मुख्य रूप से धारा-4 के तहत अनिवार्य स्वत: प्रकटीकरण से संबंधित सूचनाएं मांगी गई थीं। आयोग ने कहा कि धारा-4 प्रत्येक लोक प्राधिकरण पर यह वैधानिक दायित्व डालती है कि वह अपने कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखे और निर्धारित श्रेणियों की सूचनाओं का सक्रिय रूप से प्रसार करे, ताकि नागरिकों को व्यक्तिगत आरटीआई आवेदन दाखिल करने की आवश्यकता न पड़े। आदेश में कहा गया कि धारा-4 के पीछे विधायी मंशा अधिकतम प्रकटीकरण और औपचारिक सूचना मांगने की प्रक्रिया का न्यूनतम उपयोग सुनिश्चित करना है।
सूचना अधिकारियों को किया गया ट्रांसफर
सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से कहा गया कि मांगी गई सूचना जीएसटी, वैट, आबकारी, प्रवर्तन, विधिक, कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी, लेखा और प्रशासन समेत कई शाखाओं से संबंधित है तथा उसकी शाखा से जुड़ी जानकारी नौ जून, 2026 के पत्र के माध्यम से उपलब्ध करा दी गई है।
हालांकि आयोग ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि आरटीआई आवेदन को निर्धारित अवधि के भीतर संबंधित शाखाओं अथवा नामित लोक सूचना अधिकारियों को स्थानांतरित किया गया था।
आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘नामित लोक सूचना अधिकारी केवल इस आधार पर अपनी वैधानिक जिम्मेदारी से बच नहीं सकता कि सूचना विभिन्न शाखाओं से संबंधित है। उसका दायित्व है कि वह संबंधित अभिरक्षकों अथवा नामित लोक सूचना अधिकारियों से जानकारी प्राप्त कर सूचना मांगने वाले को समेकित उत्तर उपलब्ध कराए।’
भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना आवश्यक
आयोग ने कहा कि जिन सूचनाओं के सार्वजनिक होने से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है, उनका व्यापक स्तर पर स्वत: प्रसार करना लोक प्राधिकरणों की जिम्मेदारी है। आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के उन निर्देशों का भी उल्लेख किया, जिनमें केंद्रीय और राज्य सूचना आयोगों को धारा-4 के प्रभावी क्रियान्वयन की सतत निगरानी करने और आवश्यक सिफारिशें जारी करने के लिए कहा गया है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार के सभी विभाग आरटीआई अधिनियम की धारा-4 को उसकी अक्षरश: भावना के अनुरूप लागू करने के लिए बाध्य हैं और उन्हें सर्वोच्च न्यायालय तथा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
इसके साथ ही, आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सभी प्रशासनिक सचिव और विभागाध्यक्ष यह सुनिश्चित करें कि धारा-4 के तहत स्वत: सार्वजनिक की जाने वाली सभी सूचनाएं विभागीय वेबसाइटों पर उपलब्ध हों तथा उनका नियमित अद्यतन और रखरखाव किया जाता रहे।
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